जानिए सरस्वती पूजा का महत्व

जैसा कि हम सभी जानते बसंत पंचमी बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक माना जाता है इस दिन पूरे देश में विद्या बुद्धि  और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की आराधना की जाती है।

देवी सरस्वती को शिक्षा ज्ञान बुद्धि और कला संगीत की देवी कहा जाता है उनके आशीर्वाद से व्यक्ति को  विद्या और बुद्धि की प्राप्ति होती है। 

मां सरस्वती के पूजन के लिए विशेष सामग्रियों की जरूरत होती है जिसमें सफेद कपड़ा ,सफेद या पीला फूल, आम के पत्ते, बेलपत्र ,हल्दी, कुंकू, चावल, पांच प्रकार के ऋतु फल, नारियल और केला ,एक कलश , सुपारी, पान के पत्ते , दुभा , दिया, अगरबत्ती, गुलाल ,दूध, कलम यह सामग्री सम्मिलित है।

बसंत पंचमी के दिन सर्वप्रथम सुबह उठकर नीम या  तुलसी के पत्तों का लेप लगाकर स्नान करना चाहिए इससे शरीर शुद्ध हो जाता है और साथ ही साथ कई प्रकार के रोग भी समाप्त हो जाता हैं।

घर के जिस स्थान पर आप पूजा करने वाले हैं उस स्थान को अच्छे तरीके से साफ कर लीजिए  इसके पश्चात आप उसे स्थान पर सफेद कपड़ा बिछाकर मूर्ति को स्थापित कर दीजिए फिर उस स्थान को गंगाजल से शुद्ध कर दीजिए कर , मूर्ति को स्थापित करने के पश्चात आप कलश को स्थापित करें।  कलश स्थापन के लिए आप कलश में गंगाजल, आम का पल्लू, कुछ पैसे, सुपारी और हल्दी का गांठ उस कलश में डाल दें अब आप उस कलश के ऊपर  एक ऋतु रख दे और उस कलश को स्थापित कर दे।  अब बची हुई सारी सामग्री से मां सरस्वती का पूजन कर लीजिए।

सबसे महत्वपूर्ण बात मां सरस्वती की पूजा के दौरान ही आप किताब कॉपी और कलम की भी पूजा करें इन सब चीजों पर भी अक्षत, दुबे ,कुमकुम और ऋतु पर चढ़ा दें।

मां सरस्वती के पूजा के दौरान आप इस  इस मंत्र का अवश्य जाप करें वह भी 108 बार ” गुरु गृह गए पढ़न रघुराई अल्प काल विद्या सब आई” इस मंत्र का मतलब है कि भगवान श्रीराम कुछ ही समय के लिए गुरु के घर पढ़ने गए और उन्हें अल्पकाल में अर्थात थोड़े ही समय में विद्या की प्राप्ति हो गई।

और पूजा के अंत में  हवन करें धूप और दीप के साथ मां की आरती करें और क्षमा प्रार्थना जरूर करें।

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