जानिए कुछ अनोखी बातें पूजा के विधानों से संबंधित

पूजा में दो शिवलिंग, 3 गणेश , 2 सूर्य प्रतिमा ,3 देवी प्रतिमा, 2 गोमती चक्र और 2 शालिग्राम का पूजन नहीं करना चाहिए तथा अपने घर के  मंडप में भी नहीं रखना चाहिए।

आप अपने घर में 9 इंच या 22 सेंटीमीटर से छोटी देवी देवता की प्रतिमा रखें यदि किसी देवी या देवता की प्रतिमा 9 इंच या 22 मीटर से बड़ी है तो उसे शुभ नहीं माना जाता है ऐसी बड़ी प्रतिमाओं का सही स्थान मंदिर में ही माना जाता है।

यदि आप मंदिर में पूजा करने के उपरांत परिक्रमा करते हैं तो आपका यह जाना आवश्यक है कि देवी की परिक्रमा एक बार, सूर्य की 7 बार, गणेश की तीन बार, विष्णू की चार बार तथा शिव की आधी परिक्रमा ही करनी चाहिए क्योंकि इसे ही शास्त्रों के अनुसार शुभ माना गया है।

हिंदू धर्म में पूजा के उपरांत आरती को बहुत महत्व दिया गया है इसीलिए सही तरीके से आरती की विधि जानना आवश्यक है आरती करते समय भगवान विष्णु के समक्ष 12 बार, सूर्य के समक्ष 7 बार , भर दुर्गा के समक्ष ११ बार , गणेश के समक्ष 4 बार आरती घुमानी चाहिए।

पूजा करते समय केवल भूमि पर  बैठकर पूजा ना करें। पूजा करते समय आप किसी आसन का प्रयोग अवश्य करें और इस बात का अत्यधिक ध्यान रखें कि वह आसान ऊनी या कुश की बनी हुई हो क्योंकि इसे ही शुभ माना जाता है।

वास्तु पुरुष के अनुसार यदि आप घर बनवाते समय या यूं कहें शिलान्यास के समय अगर आप अपने घर के पूरब ,उत्तर और ईशान दिशा में नीची भूमि का प्रयोग करते हैं तो यह सबके लिए अत्यंत लाभप्रिये  होती है तथा अन्य दिशाओं की  नीची भूमि सबके लिए हानिकारक मानी जाती है।

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